वाराणसी में सीएम योगी बोले, एआई से भ्रम फैलाया जा रहा
काशी में मूर्तियाँ तोड़ने का आरोप झूठा
ब्रेकिंग इनसाइट्स
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को वाराणसी के दौरे पर हैं। इस दौरान मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए काशी को लेकर फैलाए जा रहे कथित भ्रम और सोशल मीडिया पर वायरल दावों पर उन्होंने कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग योजनाबद्ध तरीके से काशी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, टूटी हुई मूर्तियों की एआई तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर यह झूठ फैलाया जा रहा है कि काशी में मूर्तियाँ तोड़ी जा रही हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि काशी अविनाशी है। काशी के प्रति हर सनातन धर्मावलंबी और हर भारतवासी अपार श्रद्धा का भाव रखता है। लेकिन स्वतंत्र भारत में काशी को जो सम्मान मिलना चाहिए था, जो विकास होना चाहिए था और समग्र विकास के कार्यक्रमों को जो महत्व मिलना चाहिए था, वह आज़ादी के तत्काल बाद नहीं मिल सका।
पिछले ग्यारह–साढ़े ग्यारह वर्षों के भीतर काशी ने एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए उसका संवर्धन किया है। साथ ही भौतिक विकास के कार्यों के माध्यम से काशी ने नई ऊँचाइयों को भी प्राप्त किया है। आज काशी को एक नई वैश्विक पहचान मिली है। यह हम सभी का सौभाग्य है कि काशी का प्रतिनिधित्व देश की संसद में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं।
प्रारंभ से ही उनका स्पष्ट दृष्टिकोण रहा है कि काशी की पुरातन काया को संरक्षित रखते हुए उसे नए कलेवर में देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाए। इसी सोच के अनुरूप पिछले ग्यारह–साढ़े ग्यारह वर्षों में काशी के लिए योजनाएँ तैयार की गईं। काशी के लिए 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएँ स्वीकृत की गईं, जिनमें से 36 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएँ लोकार्पित हो चुकी हैं। शेष परियोजनाएँ तेज़ी से प्रगति पर हैं।
ये सभी परियोजनाएँ काशी के समग्र विकास से जुड़ी हैं, जिनमें आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी गई है। इन योजनाओं का उद्देश्य यह भी है कि काशी में नए संस्थान खुलें, परंपरागत उद्यमियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को जीआई टैग के माध्यम से वैश्विक पहचान मिले और स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके।
इन सभी क्षेत्रों में पिछले ग्यारह–साढ़े ग्यारह वर्षों में युद्ध स्तर पर काम हुआ है। काशी की गलियों की स्थिति 2014 से पहले कैसी थी, यह किसी से छुपी नहीं है। काशी विश्वनाथ धाम बनने से पहले औसतन श्रद्धालुओं की संख्या पाँच हजार से लेकर अधिकतम पच्चीस हजार तक रहती थी। आज वही संख्या प्रतिदिन सवा लाख से डेढ़ लाख तक पहुँच चुकी है।
सावन मास, महाशिवरात्रि और अन्य बड़े आयोजनों के दौरान यह संख्या छह लाख से लेकर दस लाख तक पहुँच जाती है। केवल पिछले साल ही काशी में ग्यारह करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ धाम में दर्शन किए।
काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद से अब तक काशी ने देश की जीडीपी में लगभग एक लाख तीस हजार करोड़ रुपये का योगदान दिया है। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं—चाहे वह गाइड के रूप में हों, पुरोहित्य कर्म के रूप में, व्यापार, फूल-पत्ती और प्रसाद की बिक्री, होटल, रेस्टोरेंट, नाविक, टैक्सी या अन्य सेवाओं के माध्यम से।
आज काशी की सभी प्रमुख सड़कें फोर लेन से जुड़ी हैं। यातायात की स्थिति में व्यापक सुधार हुआ है और घंटों के जाम की जगह अब सुगम यातायात व्यवस्था है। काशी के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से वंदे भारत, अमृत भारत सहित नई रेल सुविधाएँ शुरू हुई हैं।
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